Friday, September 28, 2012

लता मंगेशकर : भारत की आवाज


                             

कहते हैं संगीत ईश्वर है। सच ही, संगीत प्रकृति के कण-कण में व्याप्त है। अखिल ब्रह़मांड एक प्रकार का संगीत है। नन्हे से घुंघरु की खनक से लेकर नदियों के कलरव और सघन वनों की शांति को भंग करती पत्तियों की चरमराहट में है संगीत। संगीत चिडिय़ों की चहचहाहट संग भोर के प्रकाश में घुल जाता है। रात गए झींगुरों की आवाज संग नाच उठता है। कोयल की कूक बन आम्रमंजरियों-सा महक उठता है। संगीत मेघ मल्हार बन बादलों से बरस उठता है और रौशनी बन चिरागों रौशन हो उठता है। यही संगीत जब सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की आवाज बन जाता है तो हमारी आत्मा को छू लेता है। हमारा मन-प्राण झंकृत हो उठता है।  प्रियतमा की बाहों में झूम गा उठता है ‘तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया...’ सिली-सिली बिरहा की आग में जल उठता है। ‘प्यार किया तो डरना क्या’ गा कर  बगावत कर देता है। ‘लग जा गले’ कह आंखों से आंसू बन झरता है... तो कमर्शियल फिल्मों की तेज धूनों संग यह गाता है ‘दिल तो पागल है...’।

सुप्रसिद्घ संगीतकार नौशाद के शब्दों में- ‘‘अभी तक हम इस बात का अंदाज नहीं लगा पा रहे हैं कि लता मंगेशकर के रूप में हमें ऊपर वालों ने क्या दिया ! यह खुशकिस्मती है कि हम उस दौर में हैं जिसमें लता जी ने जन्म लिया। उन्होंने गायकी की शुरुआत उस दौर में की, जब नूरजहां, शमशाद बेगम, अमीरबाई और जौहराबाई अम्बालेवाली जैसे जानदार बड़े नाम मौजूद थे। बावजूद इसके लता जी ने अपनी न सिर्फ एक अलग पहचान बनाई बल्कि श्रेष्ठ और शीर्ष स्थान हासिल भी किया। ’’

भारतीय सिनेमा में लता मंगेशकर का नाम 'सिंगिंग' से गूंथा-सा लगता है। इनके गाने हजारों-करोड़ों लोगों के दिलो-दिमाग पर छाये हैं और दुनिया भर में गुनगुनाये जाते हैं । इन्होंने अलग-अलग भाषाओं में छह दशकों से भी अधिक समय तक गाने गाये और भारतीय संगीत को नई ऊचाईयां दी। गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड  ने माना है कि लता दुनिया भर में सर्वाधिक रिकार्ड की गई गायिका हैं । उन्होंने  20 से अधिक भाषाओं में  30 हजार से अधिक गाने गाये हैं।


लता मंगेशकर का जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर में 28 सितम्बर, 1929 को हुआ ।  ये पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं जिनके नाम हैं आशा भोंसले, मीना खादीकर, ऊषा मंगेशकर और ह्रदयनाथ मंगेशकर। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर जाने-माने गायक और स्टेज ऐक्टर थे। लता जी के पहले गुरु भी वही थे। १३ वर्ष की अल्पायु में ही उनके पिता की मृत्यु हो गई। परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने इस छोटी-सी उम्र में ही मराठी और हिंदी फिल्मों में काम करना शुरू किया। 


जब स्वतंत्रता आन्दोलन के समय भारत छोड़ो आंदोलन अपने चरम पर था तब 1942 में उनके पिता दुनिया से विदा हो गए, लता के कंधों पर पूरे परिवार का ख़र्च चलाने की ज़िम्मेदारी आ गई  बाल कलाकार के रूप में उनकी पहली फिल्म थी ‘पाहिली मंग्लागौर’। इसी फिल्म में इन्होंने अपना पहला गाना ‘नाटी चैत्रीची नावालाई... गाया। पहला हिंदी गाना ‘पा लागू कर जोरी... 1947 में बनी फिल्म ‘आपकी सेवा में’ के लिए गाया। उस समय जबकि शमशाद बेगम और नूरजहाँ का फिल्मी दुनिया में राज छाया था। लता मंगेशकर ने धीरे-धीरे अपनी पहचान ‘मजबूर’ और ‘महल’ जैसी फिल्मों से बनाई। भारत-चीन युद्घ के बाद 1962 में कवि प्रदीप (असल नाम रामचंद्र द्विवेदी ) का लिखा गाना ‘ऐ मेरे वतन के लोगों...’ गाया तो माहौल इतना गमगीन हो उठा कि पंडित जी की आंखों से आंसू आ गये !

ईश्वर की विशेष रूप से तराशी गई जादुई आवाज के साथ लता मंगेशकर ने मधुबाला, मीना कुमारी से लेकर माधुरी दीक्षित तक कई हीरोइनों को अपनी आवाज दी। 70 की उम्र में भी उन्होंने अपनी आवाज की मधुरता से चाहने वालों को मंत्रमुग्ध कर दिया जब उन्होंने फिल्म 'दिल से' का ‘जिया जले जा जले...’ गाया जिसे मात्र 40 मिनट में पूरा किया गया था। उन्होंने लगभग सभी बड़े संगीत निर्देशकों के साथ काम किया है। नौशाद, सी रामचंद्र, एसडी बर्मन, मदन मोहन और शंकर जयकिशन के साथ अपने सबसे अच्छे प्रदर्शन दिए। ‘अभिमान’, ‘दस्तक’ और ‘आम्रपाली’ यादगार फिल्मों में हैं। 1990 के दशक में ‘रूदाली’, ‘हम आपके है कौन’ और ‘लेकिन’ जैसी अनेक फिल्मों को आवाज दी (जिसे इन्होंने प्रोड्यूज भी किया)। इन्होंने कई मराठी फिल्मों को भी प्रोड्यूज किया। लता मंगेशकर को 1989 में सर्वोच्च भारतीय सिने पुरस्कार दादा साहब फाल्के और 2001 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। वे हर संगीतकार की सपना हैं


लता जी अब जीवित किंवदंती बन चुकी हैं। जब तक हो सके, वे गाती रहें... आएगा आने वाला... । जीवेद शरदः शतम....

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